अँग्रेज़ी में तीन "W" होते है जिनका क़ोई भरोसा नहीं है।
पहला है "WEATHER" (मौसम) कोई भरोसा नहीं है। कब बरसेगा कब धूप होगी।
दूसरा है "WIFE" (पत्नी) आज आपकी है कल छोड कर जा सकती है।
तीसरा है WORK (काम) आप किसी के यहाँ 20 साल भी नौकरी करें कोई भरोसा नहीं कि कल भी आप को रखेगा जिस दिन चाहेगा आपको निकाल दे देगा।
भारत में ये तीनों ही पक्के है। मौसम एक दम पक्का है कब जाड़ा होगा, कब बारिश होगी कब गर्मी होगी सब पक्का है और पत्नी तो सबसे ज़्यादा पक्की है सात-सात जन्म तक साथ नहीं छोड़ती इतनी पक्की वाईफ तो दुनिया में कहीं नहीं है और वर्क यानी काम भी बहुत पक्का है। फिर हमारी कविताएँ तो हमारे समाज, संस्कृति, देश और सभ्यता के हिसाब से होनी चाहिए। अँग्रेज़ों के कविताएँ हम क्यों सीखे? व्यक्तिगत बात चीत में तो अँग्रेज़ी बिल्कुल मत बोलिए। एक बात और अपने दिमाग़ से निकाल दीजिए कि अँग्रेज़ी अंतरराष्ट्रिय भाषा है। अँग्रेज़ी 200 में से केवल 14 देशों में बोली जाती है। बाकी सब देशों की अपनी अलग अलग भाषाएँ है जैसी की फ्रांस, रूस, हालैण्ड, जर्मनी, चीन, जापान। अँग्रेज़ी केवल उन्ही देशों में है जो अँग्रेज़ों के गुलाम थे जैसे की न्यूजीलेंड, कनाडा, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, आस्ट्रेलया, अमेरिका। ये सब अँग्रेज़ों के गुलाम देश थे। इसीलिये अँग्रेज़ी यहाँ पर है. अँग्रेज़ी दुनिया के सबसे बेकार भाषा है, अँग्रेज़ी में शब्दों की संख्या सबसे कम और व्याकरण सबसे मूर्खता वाला है।
साभार भाई राजीव दीक्षित जी
भारत में ये तीनों ही पक्के है। मौसम एक दम पक्का है कब जाड़ा होगा, कब बारिश होगी कब गर्मी होगी सब पक्का है और पत्नी तो सबसे ज़्यादा पक्की है सात-सात जन्म तक साथ नहीं छोड़ती इतनी पक्की वाईफ तो दुनिया में कहीं नहीं है और वर्क यानी काम भी बहुत पक्का है। फिर हमारी कविताएँ तो हमारे समाज, संस्कृति, देश और सभ्यता के हिसाब से होनी चाहिए। अँग्रेज़ों के कविताएँ हम क्यों सीखे? व्यक्तिगत बात चीत में तो अँग्रेज़ी बिल्कुल मत बोलिए। एक बात और अपने दिमाग़ से निकाल दीजिए कि अँग्रेज़ी अंतरराष्ट्रिय भाषा है। अँग्रेज़ी 200 में से केवल 14 देशों में बोली जाती है। बाकी सब देशों की अपनी अलग अलग भाषाएँ है जैसी की फ्रांस, रूस, हालैण्ड, जर्मनी, चीन, जापान। अँग्रेज़ी केवल उन्ही देशों में है जो अँग्रेज़ों के गुलाम थे जैसे की न्यूजीलेंड, कनाडा, पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश, आस्ट्रेलया, अमेरिका। ये सब अँग्रेज़ों के गुलाम देश थे। इसीलिये अँग्रेज़ी यहाँ पर है. अँग्रेज़ी दुनिया के सबसे बेकार भाषा है, अँग्रेज़ी में शब्दों की संख्या सबसे कम और व्याकरण सबसे मूर्खता वाला है।
साभार भाई राजीव दीक्षित जी
